अपनी आज़ादी को हम | APNI AZADI KO HUM
अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं हमने सदियों में ये आज़ादी की नेमत पाई है सैंकड़ों कुर्बानियाँ देकर ये दौलत पाई है मुस्कुरा कर खाई हैं सीनों पे अपने गोलियां कितने वीरानों से गुज़रे हैं तो जन्नत पाई है ख़ाक में हम अपनी इज्ज़त … Read more