Chauri Chaura Century Celebrations
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4 फरवरी यानी आज चौरा-चौरी घटना (Chauri Chaura Kand) को 99साल पूरे हो चुके हैं. ऐसे में इस अवसर के पूरे होने पर एक वर्चुअल कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने भाग लिया और कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
4 फरवरी को चौरी चौरा कांड के 99 साल पूरे हो जाएंगे
चौरीचौरा की घटना में 23 पुलिसवालों की मौत हो गई थी
चौरा चौरी कांड गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड
vande mataram guinness book of world record
चौरा चौरी कांड गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड
4 फरवरी को पूरे प्रदेश में गाया जाएगा वंदेमातरम्
इस संबंध में प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने शिक्षा विभाग के साथ मंडलायुक्त और जिलाधिकारियों के लिए आदेश जारी किया है. आदेश के अनुसार बेसिक, माध्यमिक और उच्च संस्थाओं को गायन में शामिल होने वाले प्रतिभागियों की लिस्ट मंगलवार शाम तक संस्कृति विभाग को देनी होगी. पूरे प्रदेश में 4 फरवरी को सुबह 10 बजे वंदेमातरम् गाया जाएगा. इसी क्रम में चौरी-चौरा और स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को नमन करते हुए सैल्यूट मुद्रा में वंदेमातरम् के पहले छंद के गायन का वीडियो बनाना होगा.
चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव को योगी सरकार यादगार बनाने की तैयारी कर रहा है. इस दिन प्रदेश में वंदेमातरम् गायन का विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी की जा रही है. 4 फरवरी को आयोजित होने वाले शताब्दी महोत्सव के आयोजन पर सभी जिलों में गायन की व्यवस्था कर रहा है. समारोह के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता को संबोधित भी करेंगे।
कम से कम 20 सेकेंड का हो वीडियो
जारी आदेश के मुताबिक प्रत्येक वीडियो में एक ही कंटेस्टेंट सैल्यूट की मुद्रा में गायन करते हुए वीडियो बनाएगा. वीडियो कम से कम 20 सेकंड का होना चाहिए. कंटेस्टेंट को यह ध्यान देना होगा कि गाते समय उच्चारण बिल्कुल सही हो.
क्या है चौरा चौरी कांड
चौरी चौरा कांड 4 फरवरी 1922 को ब्रिटिश भारत में संयुक्त राज्य के गोरखपुर जिले के चौरी चौरा में हुई थी, जब असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाले प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह पुलिस के साथ भिड़ गया था। जवाबी कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों ने हमला किया और एक पुलिस स्टेशन में आग लगा दी थी, जिससे उनके सभी कब्जेधारी मारे गए। इस घटना के कारण तीन नागरिकों और 22 पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। महात्मा गांधी, जो हिंसा के सख्त खिलाफ थे, ने इस घटना के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में 12 फरवरी 1922 को राष्ट्रीय स्तर पर असहयोग आंदोलन को रोक दिया था।चौरी-चौरा कांड के अभियुक्तों का मुक़दमा पंडित मदन मोहन मालवीय ने लड़ा और उन्हें बचा ले जाना उनकी एक बड़ी सफलता थी।
इस घटना के तुरन्त बाद गांधीजी ने असहयोग आन्दोलन को समाप्त करने की घोषणा कर दी। बहुत से लोगों को गांधीजी का यह निर्णय उचित नहीं लगा।विशेषकर क्रांतिकारियों ने इसका प्रत्यक्ष या परोक्ष विरोध किया। 1922 की गया कांग्रेस में प्रेमकृष्ण खन्ना व उनके साथियों ने रामप्रसाद बिस्मिल के साथ कन्धे से कन्धा भिड़ाकर गांधीजी का विरोध किया।